When Vision Returns: A Story of Compassion and Care
“From Darkness to Light: Stories of Sight and Service in Balrampur”
लायंस क्लब बलरामपुर द्वारा संचालित पन्नालाल लाल सरावगी लायंस आई हॉस्पिटल में हर सुबह एक नई उम्मीद जन्म लेती है। यहाँ आने वाले मरीज सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि अपने जीवन में फिर से उजाला पाने का सपना लेकर आते हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान अस्पताल ने जो सेवाएँ दीं, वे केवल आँकड़े नहीं, बल्कि हजारों कहानियों का संग्रह हैं , संघर्ष, सेवा और सफलता की कहानियाँ।
इस सेवा यात्रा की नींव वर्ष 1988 में पड़ी, जब इस अस्पताल के लिए भूमि दान की गई। इसके बाद 2 अक्टूबर 1990 को लायन वी॰ के॰ शुक्ला के प्रयासों से साप्ताहिक OPD की शुरुआत हुई , एक छोटा कदम, जिसने आगे चलकर एक विशाल सेवा अभियान का रूप ले लिया। वर्ष 1992 में Lions Clubs International Foundation (LCIF) से 100,000 अमेरिकी डॉलर का अनुदान प्राप्त हुआ, जिसने इस परियोजना को मजबूती और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रोजेक्ट के प्रथम प्रोजेक्ट चेयरपर्सन डॉ. वी॰ के॰ शुक्ला ने इसे दिशा और गति प्रदान की तथा उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है ।
यह पूरा प्रोजेक्ट LCIF के सहयोग से संचालित है, जिसने समाज के कमजोर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुँचाने का बीड़ा उठाया। इस सेवा कार्य में लायंस क्लब बलरामपुर, डिस्ट्रिक्ट 321B1 की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।लायंस क्लब बलरामपुर का लायन के. के. बाजपेयी बलरामपुर चीनी मिल्ज़ के गरणरल मैनेजर तथा क्लब के पथ प्रदर्शक, लायन परमजीत सिंह (DG Elect) का नेतृत्व , लायन प्रद्युम्न सिंह (सचिव) का समर्पण, और लायन अशोक गुप्ता तथा लायन प्रीतपाल सिंह वरिष्ठ सदस्य का नेतृत्व इस परियोजना की सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। इन सभी के सहयोग से अस्पताल ने सेवा को एक आंदोलन का रूप दे दिया है।
अस्पताल में हर महीने सैकड़ों मरीज OPD में आते , कोई पहली बार, तो कोई फॉलो-अप के लिए। जुलाई 2025 से अप्रैल 2026 तक, लगभग 25,885 मरीजों ने यहाँ उपचार प्राप्त किया। यह संख्या केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उन लोगों की गिनती है जिनकी जिंदगी बदली।
इन मरीजों में एक नाम था , रामदीन। एक साधारण किसान, जिसकी आँखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी। खेत में काम करना मुश्किल हो गया था, और परिवार की चिंता अलग। जब वह अस्पताल पहुँचा, तो उसे पता चला कि उसे मोतियाबिंद है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इलाज के बारे में सोच भी नहीं पा रहा था। लेकिन यहाँ उसे बताया गया कि LCIF परियोजना के अंतर्गत उसका ऑपरेशन नि:शुल्क होगा।
अस्पताल में आधुनिक तकनीकों से सर्जरी की जाती है , फेको सर्जरी, IOL इम्प्लांट, लेजर उपचार आदि। पूरे वर्ष में 1,815 से अधिक सर्जरी की गईं, जिनमें 1,643 IOL सर्जरी शामिल थीं। यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि विश्वास का परिणाम था। डॉक्टरों की टीम, नर्सिंग स्टाफ और स्वयंसेवकों की मेहनत ने हर मरीज को एक नई जिंदगी दी।
रामदीन का ऑपरेशन सफल रहा। जब पट्टी खुली, तो उसकी आँखों में आँसू थे , दर्द के नहीं, खुशी के। उसने वर्षों बाद साफ देखा अपने खेत, अपने बच्चों और अपने सपनों को। वह मुस्कुराते हुए बोला, “अब मैं फिर से काम कर पाऊँगा।” यहाँ प्रतिदिन कई रामदीन आते हैं और सफल इलाज के बाद अपने घर हंसते हुए जाते हैं।
अस्पताल की यही खासियत है , यहाँ हर मरीज को सम्मान और संवेदना के साथ इलाज मिलता है। चाहे वह गाँव का मरीज हो या शहर का मरीज़ हो या फ्री कैम्प के माध्यम से आया हो, सभी को समान सेवा दी जाती है। अस्पताल का यह समर्पण ही उसे विशेष बनाता है।
इस परियोजना ने न केवल आँखों की रोशनी लौटाई, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी दी। हर महीने बढ़ती मरीजों की संख्या यह दर्शाती है कि लोगों का विश्वास इस संस्था पर लगातार मजबूत हो रहा है।
यह कहानी सिर्फ रामदीन की नहीं है ,यह उन हजारों लोगों की कहानी है जिनकी दुनिया इस अस्पताल ने रोशन की। LCIF के सहयोग और लायंस क्लब की सेवा भावना ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो अंधकार को भी हराया जा सकता है।
जहाँ सेवा है, वहाँ सच्चा प्रकाश है।





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