Triple Planetary Crisis
« Triple Planetary Crisis » – Climate Change, Pollution, and Biodiversity loss!
From Mahanagar Colony to Prem Saran Nagar Colony: My Personal Shift Towards an Eco-Friendly Life
एक लायन सदस्य H.N.Singh Lions Club Lucknow Kapoorthala ,District 321B1 की प्रेरक कहानी: आधुनिक जीवनशैली से पर्यावरणीय बदलाव तक
“हमें बिना सोचे-समझे उपभोग करने की अपनी आदत को छोड़ना होगा” यह केवल एक विचार नहीं था, बल्कि एक संकल्प था, जिसे एक लायन सदस्य ने अपने जीवन में उतारकर दिखाया। जब दुनिया “ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस” जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के ह्रास से जूझ रही है, तब उन्होंने यह समझ लिया कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस बदलाव की आवश्यकता है।
महानगर कॉलोनी लखनऊ जो शहर के बीच में स्थित है की सुविधाजनक जीवनशैली को पीछे छोड़कर प्रेम सरन नगर ( बिजनोर क़स्बा लखनऊ) में एक नया अध्याय शुरू किया। यह कदम आसान नहीं था। वहाँ न तो शहर जैसी त्वरित सुविधाएँ थीं और न ही आराम की वही परिभाषा। लेकिन उन्होंने एक बड़ा सवाल खुद से पूछा , क्या मैं अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण की रक्षा के लिए कुछ बदल सकता हूँ? और जवाब था , “हाँ।”
उन्होंने अपने घर में सौर ऊर्जा को अपनाया, जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हुई। पानी के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रण प्रणाली को अपनाया। कचरे का पृथक्करण और जैविक खाद बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। खेतों में जैविक खेती शुरू की, जहाँ बिना रसायनों के उगाई गई सब्जियाँ न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर थीं, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी थीं।
धीरे-धीरे यह बदलाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने मित्रों और समुदाय के लोगों को भी इस जीवनशैली से जोड़ना शुरू किया। बच्चों को प्रकृति से जोड़ने, उन्हें कम्पोस्टिंग और पौधारोपण सिखाने का प्रयास किया। देखते ही देखते एक छोटा प्रयास एक सामूहिक आंदोलन में बदल गया।
लोग अक्सर पर्यावरण संरक्षण की बातें करते हैं, सुझाव देते हैं, लेकिन इस लायन सदस्य ने “करके दिखाया।” उन्होंने यह सिद्ध किया कि सस्टेनेबिलिटी का अर्थ सुविधाओं का त्याग नहीं, बल्कि उन्हें अधिक जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग करना है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि यदि एक व्यक्ति ठान ले, तो वह समाज में एक सकारात्मक लहर उत्पन्न कर सकता है।
Lions International के तृतीय सेवा सप्ताह , पर्यावरण के संदर्भ में यह उदाहरण अत्यंत प्रेरणादायक बन गया। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रमाण है कि बदलाव व्यक्तिगत स्तर से शुरू होकर सामूहिक चेतना तक पहुँच सकता है।
आज भी वही प्रश्न हमारे सामने खड़ा है,क्या हम अपनी सुविधा थोड़ी कम कर सकते हैं? क्या हम प्लास्टिक का उपयोग घटा सकते हैं? क्या हम ऊर्जा और पानी की बचत को अपनी आदत बना सकते हैं?
छोटे-छोटे बदलाव ही बड़े परिवर्तन की शुरुआत बनते हैं।
आज लिया गया एक जिम्मेदार निर्णय, आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकता है।
प्रश्न अब भी वही है आप क्या बदलने को तैयार हैं?
H.N.SINGH
(Lions International Faculty, SPHEEHA Member, Naturalist , HAM Radio Licence VU2YUH , Trekker & Mountaineer )



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